हाल ही में एस एच एम वी फाउंडेशन द्वारा एक महत्वपूर्ण भाषाई सम्मेलन "त्रिभाषा सम्मेलन" का आयोजन किया गया।
भारत विविध भाषाओं का देश है, जहाँ भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना की वाहक है। इसी भावना को साकार करने हेतु एस एच एम वी फाउंडेशन द्वारा हाल ही में आयोजित "त्रिभाषा सम्मेलन" भाषाई समरसता का प्रेरणादायक उदाहरण बना।
इस सम्मेलन का मूल लक्ष्य तेलुगु, हिंदी और संस्कृत तीनों भाषाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना, भाषाओं के प्रति सम्मान बढ़ाना और सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देना था।
“त्रिभाषा – भारत की आत्मा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का प्रतिबिंब है। तेलुगु क्षेत्रीय समृद्धि का प्रतीक है, हिंदी राष्ट्रीय संवाद की सेतु है और संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल आधारशिला है।
इस सम्मेलन के रूपकर्ता एवं आयोजक डॉ. गुंडाल विजय कुमार हैं, जिनके नेतृत्व में त्रिभाषा अभियान आज देशभर में एक वैचारिक आंदोलन का रूप ले चुका है। उनका दृष्टिकोण भाषाओं को जोड़ने का है, न कि तुलना करने का।